

बलौदाबाजार, 28 अप्रैल 2026।
जिले में बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक ठोस कदम उठाते हुए बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश और जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य है—हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन दिलाना।
संयुक्त टीम ने बलौदाबाजार और कसडोल विकासखंड के विभिन्न इलाकों में दुकानों, होटलों, ढाबों, कारखानों और पान ठेलों पर सघन निरीक्षण किया। इस दौरान संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उनके भविष्य के साथ गंभीर अन्याय भी है।
निरीक्षण के दौरान 5 नाबालिग बच्चे काम करते हुए पाए गए। टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल संरक्षण में लिया और बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अभियान के दौरान एक सकारात्मक पहलू यह सामने आया कि जिले में कोई भी बच्चा भिक्षावृत्ति करते हुए नहीं मिला। बावजूद इसके प्रशासन सतर्क है और भविष्य में किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए निगरानी और जागरूकता अभियान लगातार जारी रखने की बात कही गई है।
प्रशासन ने दो टूक संदेश दिया है—यदि कहीं भी बाल श्रम या बाल भिक्षावृत्ति का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ श्रम कानूनों के साथ-साथ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को पांच साल तक की सजा और एक से पांच लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
इस अभियान में जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रकाश दास, संरक्षण अधिकारी दीपक राय, चाइल्ड लाइन की परियोजना समन्वयक नेहा तिवारी, मोरध्वज साहू सहित जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग, पुलिस विभाग और चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम सक्रिय रूप से शामिल रही।
जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, समाज की भी है।
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सजग रहें और कहीं भी बच्चों से काम कराए जाने या भिक्षावृत्ति की सूचना तुरंत दें।
क्योंकि हर बच्चा मजदूर नहीं, देश का भविष्य होता है — और उस भविष्य की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।





